अभिनेत्री भाग्यश्री के गणपति आरती करने पर मंदिर में तनाव का माहौल

 

महाराष्ट्र के सांगली स्थित ऐतिहासिक श्री गणपति पंचायतन संस्थान में गणेशोत्सव के दौरान उत्तराधिकारी पद और पूजा के अधिकार को लेकर पारिवारिक विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। फिल्म अभिनेत्री भाग्यश्री पटवर्द्धन -दासानी ने चार साल बाद सांगली पहुंचकर गणपति मंदिर में उत्सव मूर्ति की आरती की। हालांकि, संस्थान के मौजूदा कानूनी उत्तराधिकारी युवराज आदित्यराजे पटवर्द्धन के रहते भाग्यश्री द्वारा आरती किए जाने को लेकर मंदिर प्रबंधन और उनके बीच तीखी बहस हो गई। इस घटना के बाद गणेशोत्सव की शुरुआत में ही ऐतिहासिक मंदिर में तनाव का माहौल बन गया।

सांगली संस्थान में यह पारिवारिक और प्रशासनिक विवाद पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है। वर्ष 2013 से 2016 के बीच श्रीमंत विजयसिंह राजे पटवर्द्धन ने संस्थान के कामकाज की जिम्मेदारी अपने दामाद और भाग्यश्री के पति हिमालय दासानी को सौंपी थी। हालांकि, बाद में विजयसिंह राजे ने उन पर संस्थान की जमीनें कथित तौर पर बिना अनुमति बेचने का आरोप लगाया और उनके सभी अधिकार वापस ले लिए।

इसके बाद भाग्यश्री और हिमालय दासानी ने सांगली आना बंद कर दिया था। वर्ष 2016 से 2021 तक विजयसिंह राजे ने स्वयं संस्थान का कामकाज संभाला। वर्ष 2021 में उन्होंने अपनी रानी साहिबा के भांजे जयदीप अभ्यंकर को संस्थान की जिम्मेदारी सौंपी। बाद में 2023-24 के दौरान विजयसिंह राजे ने जयदीप अभ्यंकर के 16 वर्षीय बेटे आदित्य अभ्यंकर को गोद लेकर उसे अपना आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित किया। इसके बाद आदित्यराजे पटवर्द्धन को युवराज के रूप में मान्यता दी गई।

चार साल बाद सांगली पहुंचीं भाग्यश्री ने मंदिर में आरती को लेकर हुए विवाद पर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके पिता की तबियत फिलहाल ठीक नहीं है। इसलिए गणपति उत्सव की पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए उनकी तीन बेटियों में से किसी एक का वहां मौजूद रहना जरूरी था।

हालांकि, भाग्यश्री ने आदित्यराजे को उत्तराधिकारी घोषित किए जाने का विरोध करने के सवाल पर सीधे तौर पर कुछ कहने से परहेज किया।

अपनी बेटी भाग्यश्री के रवैये पर बोलते हुए श्रीमंत विजयसिंह राजे पटवर्द्धन भावुक और आक्रामक नजर आए। मीडिया से बातचीत के दौरान उनकी आंखों से आंसू निकल आए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाग्यश्री और उनके पति हिमालय दासानी ने संस्थान में गंभीर अनियमितताएं की थीं, जिसके कारण उन्हें संस्थान के कामकाज से हटाया गया।

विजयसिंह राजे ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि उनकी बेटी ने कहा था कि “कल बूढ़ा-बूढ़ी मर जाएंगे, उसके बाद यह सब हमारा ही है।”

उन्होंने कहा कि नियमानुसार दत्तक विधान पूरा कर आदित्यराजे पटवर्द्धन को उत्तराधिकारी घोषित किया गया है। उन्होंने भाग्यश्री से अपील की कि वह उनके उत्तराधिकारी को स्वीकार करें और उन्हें बेवजह परेशान न करें।

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